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बिहार के मुख्य सचिव के कार्यालय पर कुर्की का नोटिस चस्पा

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jul 20 2019 1:49AM | Updated Date: Jul 20 2019 1:49AM
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पटना। पटना व्यवहार न्यायालय स्थित दीवानी अदालत के आदेश से 664 करोड़ 85 लाख 41 हजार 813 रुपये की वसूली के मामले में पुराना सचिवालय स्थित बिहार के मुख्य सचिव के साथ ही चार प्रधान सचिव और निबंधन रजिस्ट्रार के कार्यालय को कुर्क करने की नोटिस आज चस्पा कर दी गई। पटना व्यवहार न्यायालय के नाजिर अमरेंद्र कुमार ने आज अपने सहयोगियों के साथ पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सचिव कार्यालय पहुंचकर सरकार को मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, लघु सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव और निबंधन रजिस्ट्रार के कार्यालय की कुर्की से संबंधित नोटिस के बारे में अवगत कराया और नोटिस की एक प्रति सचिवालय की दीवार पर चस्पा कर दी।
 
इससे पहले इजरा (दीवानी न्यायालय के फैसले को कार्यान्वित कराने के लिए की जाने वाली कार्रवाई) मुंसिफ सारिका वहालिया की अदालत ने 03 जुलाई 2019 को भूमि विकास बैंक की ओर से पुराना सचिवालय स्थित कार्यालयों की कुर्की के अनुरोध के साथ दिये गये आवेदन को स्वीकार कर लिया था। अदालत ने नीलामी की शर्तों को तय करने और तारीख की सूचना प्राप्त करने के लिए मुख्य सचिव समेत सभी पक्षकारों को 25 जुलाई 2019 को न्यायालय में उपस्थित रहने को कहा है। अदालत से जारी कुर्की आदेश के अनुसार, बिहार के मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, लघु सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव और निबंधन रजिस्ट्रार के कार्यालय को कुर्क कर लिया गया है तथा न्यायालय के अगले आदेश तक उसे विक्रय, दान, अंतरित या भारित करने से रोक दिया गया है। इसी तरह जनसाधारण को भी इसे क्रय, दान या किसी भी प्रकार से प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया है।
 
मुकदमे के अनुसार बिहार राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक (बिहार एवं झारखंड), जिसे अब मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव लैंड डेवलपमेंट बैंक लिमिटेड (बिहार एवं झारखंड) के 06 जनवरी 2016 को बिहार सरकार के पास 493 करोड़ 70 लाख 36 हजार रुपये के बकाये की संपुष्टि हो गई थी। लेकिन, 31 अगस्त 2018 तक बकाया राशि की अदायगी नहीं करने के कारण उक्त तिथि तक ब्याज समेत 664 करोड़ 85 लाख 41 हजार 813 रुपये बकाया हो गये थे, जिनकी वसूली के लिए बैंक ने अदालत में आवेदन दिया था। इस क्रियान्वयन वाद के दाखिल होने के बावजूद जब सरकार ने बैंक को रुपये की अदायगी नहीं की तब 03 जुलाई 2019 को कुर्की का आदेश जारी किया। 
 
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