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संगम में मौनी अमावस्या स्रान से मिलता है सौ अश्वमेघ यज्ञ का फल

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Feb 3 2019 2:44PM | Updated Date: Feb 3 2019 2:45PM
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दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ में पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवणी में मौनी अमावस्या पर आस्था की डुबकी लगाने से सौ अश्वमेघ और राजसूय यज्ञ का फल मिलता है। रामचरित मानस में तुलसीदास लिखते हैं कि '‘माघ मकर गति रवि जब होई, तीरथ पतिहि आव सब कोहि। एहि प्रकार भरि माघ नहाई, पुनि सब निज निज आश्रम जाहि।
 
अर्थात् प्राचीन समय से ही माघ मास में सभी साधक तपस्यी ऋषि मुनि आदि तीर्थराज प्रयाग में स्रान कर अपनी अपनी आध्यात्मिक साधनात्मक प्रक्रियाओं को पूर्ण कर वापस लौटते हैं। दूसरा बालकाण्ड में उन्हेंने लिखा है ‘‘माघ मकर गतिरवि जब होई, तीरथपतिहि आव सब कोई, देव, दनुज, किन्नर नर श्रेणी, सादर मज्‍जसिंह सकल त्रिवेणी।
 
संगम में स्रान करने मौनी अमावस्या पर स्वयं देवता भी आते हैं। कहा जाता है कि प्रयाग में जब भी कुंभ होता है तो पूरी दुनिया से ही नहीं बल्कि समस्त लोकों से लोग संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने आते हैं। इनमें देवता ही नहीं त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी रूप बदल कर शामिल होते हैं।
 
कुंभ के दौरान इसलिए इस दिन का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है कि यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। प्रयाग में कुंभ महापर्व का सर्वप्रमुख स्रान मौनी अमावस्या दूसरा शाही स्रान भी होता है। हालांकि कुंभ का यह दूसरा प्रमुख स्रान बेहद खास होगा क्योंकि इसी दिन सोमवती अमावस्या भी है। कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या पर सोमवती का संयोग यदाकदा ही देखने को मिलता है जो सौभाग्य से इस बार पड़ रहा है।
 
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